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दुनिया भर में बौद्ध स्तूपों के लिए प्रसिद्ध सांची के स्तूप बनाने में भले ही स्थानीय पत्थरों का उपयोग किया गया, लेकिन यहां म्यूजियम में रखे चार दिशाओं की ओर मुंह किए खड़े शेरों वाली मूर्ति का पत्थर यहां उपलब्ध नहीं है। यह मूर्ति उप्र के मिर्जापुर जिले में स्थित चुनार में मिलने वाले सेंड स्टोन (बलुआ पत्थर) से बनी है।आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने इसकी पुष्टि की है। चार मुंह वाला यह शेर सांची के म्यूजियम में रखा हुआ है। एएसआई के अधिकारियों के मुताबिक चुनार सेंड स्टोन से बनी यह मूर्ति 200 ईसा पूर्व की है। यानी करीब 2200 साल पुरानी है। सांची स्तूप जिस पत्थर से बने हैं उसमें इसका उपयोग नहीं हुआ है।चुनार सेंड स्टोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना पुराना होता जाएगा, वायु घर्षण से उसकी चमक उतनी ही बढ़ती जाएगी। यह पानी के अंदर सैकड़ों साल तक रहने के बावजूद खराब नहीं होता है। चुनार सेंड स्टोन को जीआई पंजीकरण होने के साथ देश की बौद्धिक संपदा अधिकार (इन्टेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स) में शुमार किया गया है।महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पत्थर को उस समय चुनार से सांची तक कैसे लाया गया होगा। एएसआई के अधिकारियों के मुताबिक अनुमान यह है कि इस पत्थर को नदी के रास्ते यहां तक लाया गया होगा, क्योंकि उस समय सड़क मार्ग इतने उन्नत नहीं थे। इस पत्थर से शेरों को बनाए जाने के पीछे सोच भी यह रही होगी कि यह अलग तरह से नजर आए और देखने वाले इससे प्रभावित हों। इसकी शाफ्ट सांची में रखी हुई है, जिसमें अभिलेख भी है।
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